Wednesday, November 6, 2013
लखनऊ की सडकों पर 200 किमी चली साइकिल सम्मान यात्रा
लखनऊ। साइकिल सम्मान यात्रा ने राजधानी की सडकों पर एक सप्ताह में करीब दो सौ किलोमीटर की दूरी तय की। प्रदूषण, जाम जैसे समस्याओं से जूझ रही लखनऊ की सडकों पर हजारों लोगों ने यात्रा का खुलकर समर्थन किया और माना कि साइकिलिंग के माध्यम से ही शहर को प्रदूषण व जाम से मुक्ति मिल सकती है। लोगों ने यह भी स्वीकार किया कि साइकिल चलाने से किसी की प्रतिष्ठा कम नहीं होती बल्कि इसकी मदद से राजधानी लखनऊ का मान बढाया जा सकता है।
उत्तम प्रदेश बनाओ मंच के बैनर तले 24 अक्टूबर से शुरू हुई साइकिल सम्मान यात्रा के बारे में पर्यावरण प्रेमी तारा पाटकर ने बताया कि मैंने यात्रा इसलिए अकेले चालू की क्योंकि अगर ज्यादा लोग यात्रा में चले तो वे भी सडकों पर जाम बढायेंगे, जो ठीक नहीं। जो संदेश यात्रा के माध्यम से हम देना चाहते हैं, वह अकेले भी राहगीरों तक आसानी से पहुंच रहा है। अकेले होने पर लोग आसानी से बातचीत भी कर लेते हैं, समूह में वे अपनी बात कहने में संकोच करते हैं। यात्रा प्रतिदिन विशालखंड, गोमतीनगर से प्रारंभ हुई और पहले लखनऊ के विभिन्न छोरों पर पहुंची फिर वहां से विधानभवन पर आकर संपन्न हुई।
पहले दिन यात्रा चिनहट तिराहे पहुंची फिर निशातगंज होते हुए विधानभवन पहुंची। इसी प्रकार दूसरे दिन इंदिरानगर, मुंशी पुलिया से कुकरैल पिकनिक स्पाट, तीसरे दिन इसी रूट से इंजीनियरिंग कालेज चौराहे, चौथे दिन चौक, ठाकुरगंज, बालागंज से दुबग्गा, पांचवें दिन कैंट, आलमबाग, कृष्णानगर, सरोजनीनगर से अमौसी, छठवें दिन कैंट, तेलीबाग से पीजीआई साइकिल सम्मान यात्रा पहुंची। फिर वहां से चलकर विधानभवन पर आकर संपन्न हुई। सातवें दिन यात्रा अंबेडकर पार्क, गोमतीनगर से शुरू होकर विधानभवन तक पहुंची। यात्रा में दो दिन एक पर्यावरण मित्र नंदराम सिंह यादव ने भी पूरा साथ निभाया। आठवें दिन यात्रा पहले हाईकोर्ट, कैसरबाग पहुंचेगी फिर वहां से मुख्यमंत्री आवास तक आयेगी।
मंच के अध्यक्ष तारा पाटकर ने कहा कि दिल्ली में मेट्रो रेल के आने से थोडी तो राहत मिली लेकिन सडकों पर जाम आदि कम नहीं हो पाया। उसकी वजह साइकिल को न अपनाना है। अगर 3-5 किलोमीटर दूरी तक रहने वाले लोग साइकिल से मेट्रो स्टेशन तक आते, तो दिल्ली को जाम और प्रदूषण से मुक्ति मिल जाती लेकिन झूठी शान के चक्कर में लोग कारें त्यागने को तैयार नहीं। और यही कारें दिल्ली को रूला रही हैं। अगर लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हफ्ते में कम से कम एक दिन साइकिल से दफ्तर जाने की पहल करें, मंत्रियों व अफसरों को साइकिल अपनाने के निर्देश दें, सभी विभागों के निजी प्रतिष्ठानों को बाध्य करें तो लखनऊ के काया कल्प होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह ही साइकिल है और अगर वह सप्ताह में एक दिन साइकिल डे घोषित करती है तो इससे उसे राजनैतिक फायदा होगा व देश में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई पहल होगी।
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