Wednesday, November 6, 2013

प्रभु के सच्चे सेवक हैं साइकिल चलाने वाले-पाटकर

लखनऊ। साइकिल चलाने वाले प्रभु के सच्चे सेवक हैं और साइकिल चलाना असली प्रार्थना। प्रभु उनसे खुश होते हैं। यही लोग तो ऐसे हैं जो प्रभु की बनाई इस खूबसूरत दुनिया को प्रदूषित करके नुकसान नहीं पहुंचाते। शहर की प्रदूषित सांसों में और जहर नहीं घोलते। वे ट्रैफिक जाम का कारण नहीं बनते। बाकी सभी तो बस उसकी कायनात को बरबाद करने में ही लगे हैं। साइकिल सम्मान यात्रा लोगों को यही संदेश देना चाहती है कि वे साइकिल को अपनायें और पर्यावरण के सच्चा प्रहरी बनें। ये उदगार आज उत्तम प्रदेश बनाओ मंच के प्रमुख तारा पाटकर ने व्यक्त किये जो राजधानी के विभिन्न कोनों से अकेले ही रोज साइकिल सम्मान यात्रा निकाल रहे हैं और 20-25 किलोमीटर चलते हैं। यात्रा का आज चौथा दिन था। यात्रा करीब 11.30 बजे दुबग्गा स्थित वरदानी हनुमान मंदिर से शुरू की गई। साइकिल में “पर्यावरण पूजा ही असली पूजा, साइकिल को सम्मान दो, साइकिल चलाएं तनाव भगाएं ” जैसे नारों वाली तख्तियां लगी थी जो लोगों का ध्यान बरबस अपनी ओर खींच रही थीं। यात्रा बालागंज, ठाकुरगंज, चौक, रूमी गेट होते हुए विधानभवन पर संपन्न हुई। इस मौके पर इकट्ठे हुए लोगों से बातचीत में तारा पाटकर ने कहा कि अब सिर्फ मंदिर में जाकर घंटी बजाने से प्रभु आपकी प्रार्थना नहीं स्वीकार करने वाले, बल्कि आपको संकट में फंसी उसकी कायनात को बचाने के लिए कुछ करना होगा। लगातार बढ रहे पर्यावरण संकट को दूर करने में योगदान देने से ही आपकी प्रार्थना स्वीकार होगी। लखनऊ शहर भी अपनी खूबसूरती व नवावी तहजीब के लिए मशहूर था लेकिन अब सडकों पर बढती गाडियों, जाम व प्रदूषण ने शहर को बदसूरत व दम घोंटू बना दिया है। इन समस्याओं से निजाद पाने के लिए साइकिलिंग सबसे बेहतर तरीका है जिसके माध्यम से आप पर्यावरण को बेहतर बना सकते हैं और खुद को फिट भी रख सकते हैं। श्री पाटकर ने कहा कि साइकिल चलाने से किसी की प्रतिष्ठा कम नहीं होती बल्कि बढती है। अब वक्त आ गया है कि बडे लोग साइकिलिंग की पहल करें। अगर बडे लोग छोटे-छोटे घरेलू कामकाज निपटाने के लिए साइकिल से चलने लगें तो उनकी देखा-देखी और लोग भी वैसा करने लगेंगे। लोगों को प्रयास करना चाहिए कि हफ्ते में एक-दो दिन साइकिल से दफ्तर भी जायें। मेरे एक पडोसी हैं जो शहर के प्रतिष्ठित डाक्टर भी हैं। मै देखता हूं कि वे सडक के उस पर बने जिम में जाने के लिए भी कार का इस्तेमाल करते हैं। वे चाहें तो दो कदम पैदल चलकर भी जिम जा सकते हैं लेकिन वे ऐसा इसलिए नहीं करते क्योंकि उनको लगता है इससे उनकी प्रतिष्ठा कम हो जायेगी। वे लंबी कार के माध्यम से जिम में आने वाले अन्य लोगों को अपनी शान-ओ-शौकत भी दिखाना चाहते हैं। अब इस सोच को बदलना होगा। साइकिल सम्मान यात्रा कल अमौसी से शुरू होगी।

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