Friday, November 15, 2013

साइकिल वालों के राज में ही बेगानी हो गई साइकिल

उत्तर प्रदेश में है साइकिल वालों की सरकार राजधानी में ही नहीं है साइकिल लेन है और न साइकिल स्टैंण्ड, दिल्ली में साइकिल टैक्स फ्री, यूपी में लगता है 9 फीसदी टैक्स दूसरे मुल्कों से क्यों सबक नहीं लेती यूपी सरकार लखनऊ। अपने ही घर में बेगानी हो गई है साइकिल। सारी दुनिया में साइकिल की शान बढती जा रही है लेकिन हिन्दुस्तान के जिस उत्तर प्रदेश में साइकिल वालों की सरकार है, वहीं साइकिल को पूछने वाला कोई नहीं है। सडकों पर भयंकर ट्रैफिक जाम और सांसों में जहर घोल रहे भीषण प्रदूषण के बावजूद सरकार का कोई भी नुमाइन्दा साइकिल से चलने को तैयार नहीं है। कानफोडू हूटर बजाती गाडियों में चलना ही वे अपनी शान समझते हैं। इतना ही नहीं साइकिल से चलने वालों के लिए भी यहां कोई साइकिल लेन नहीं। अब तो साइकिल स्टैंण्ड भी खत्म कर दिये गये। दिल्ली में साइकिल पर कोई टैक्स नहीं वसूलती सरकार लेकिन यूपी में साइकिल वालों की अखिलेश सरकार नौ फीसदी टैक्स वसूलती है। साइकिल को बढावा देने के लिए कोई भी सरकारी सुविधा उत्तर प्रदेश में नहीं दी जाती। दिल्ली में साइकिल पर नहीं कोई टैक्स कई मुल्कों में तो साइकिल के लिए अलग से इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किये गये हैं। फ्री में स्टैंण्ड, टैक्स में छूट सहित तमाम सुविधाएं दी जाती हैं लेकिन लखनऊ में साइकिल को बढावा देने के लिए अब तक कोई भी जहमत नहीं उठायी गई। व्यापारियों के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने तीन हजार रूपये तक की साइकिल को टैक्स फ्री कर रखा है। इतनी रकम में एक नार्मल साइकिल व बच्चों की साइकिल की बडी रेंज आती है। इस छूट का मध्यम वर्गीय परिवार को अच्छा खासा लाभ मिलता है। दिल्ली में यूपी की अपेक्षा तीन सौ रूपये तक साइकिल सस्ती पडती है। लखनऊ साइकिल मर्चेन्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन अरोडा ने बताया कि साइकिल पर वर्तमान में कुल 9 फीसदी टैक्स लगता है। इसमें से पांच फीसदी यूपी सरकार, दो फीसदी सेंट्रल व दो फीसदी एक्साइज ड्यूटी को मिलता है। हमने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र भेजकर यूपी के टैक्स को खत्म करने की मांग की थी लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई जबाव नहीं दिया गया। सरकार की कार्य प्रणाली से भी नहीं लगता कि वह कुछ करेगी। साइकिल कैपिटल से लें सबक हालैंण्ड की राजधानी एमसटर्डम एक ऐसा शहर है जिसे दुनिया की साइकिल कैपिटल कहा जाता है। वहां ज्यादातर लोग साइकिल से ही सफर करते हैं। स्कूल-कालेज जाना हो, दफ्तर जाना हो या कहीं और जाना हो, सामान ले जाना हो, ज्यादातर काम साइकिल पर होता है। अमीर से लेकर गरीब तक सभी साइकिल से चलते हैं। वह सिर्फ इसलिए क्योंकि सरकार ने साइकिल के लिए ढेर सारी सहूलियतें दे रखी हैं। यहां साइकिल को पहले पास देने के लिए सिग्नल सिस्टम लगे हैं। उनका अलग बाइपास है। सडक पर बाइक से चलने पर 10 मिनट की पार्किंग के लिए पांच यूरो खर्च करने पडते हैं जबकि साइकिल के लिए फ्री है। वैसे भी सडक पर कार या बाइक पार्क करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यहां के मुख्य स्टेशन पर एक साथ सात हजार साइकिलें खडी की जा सकती हैं। यहां पर सन 2007 से 10 के बीच में साइकिल प्रोजेक्ट पर 70 मिलियन यूरो खर्च किये गये। यानी सरकार की ओर से साइकिल को बढावा देने के लिए प्रति व्यक्ति 13 यूरो खर्च किये गये। यूपी में तो ये सोचा ही नहीं जा सकता।

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