Wednesday, November 6, 2013
लखनऊ की सडकों पर 200 किमी चली साइकिल सम्मान यात्रा
लखनऊ। साइकिल सम्मान यात्रा ने राजधानी की सडकों पर एक सप्ताह में करीब दो सौ किलोमीटर की दूरी तय की। प्रदूषण, जाम जैसे समस्याओं से जूझ रही लखनऊ की सडकों पर हजारों लोगों ने यात्रा का खुलकर समर्थन किया और माना कि साइकिलिंग के माध्यम से ही शहर को प्रदूषण व जाम से मुक्ति मिल सकती है। लोगों ने यह भी स्वीकार किया कि साइकिल चलाने से किसी की प्रतिष्ठा कम नहीं होती बल्कि इसकी मदद से राजधानी लखनऊ का मान बढाया जा सकता है।
उत्तम प्रदेश बनाओ मंच के बैनर तले 24 अक्टूबर से शुरू हुई साइकिल सम्मान यात्रा के बारे में पर्यावरण प्रेमी तारा पाटकर ने बताया कि मैंने यात्रा इसलिए अकेले चालू की क्योंकि अगर ज्यादा लोग यात्रा में चले तो वे भी सडकों पर जाम बढायेंगे, जो ठीक नहीं। जो संदेश यात्रा के माध्यम से हम देना चाहते हैं, वह अकेले भी राहगीरों तक आसानी से पहुंच रहा है। अकेले होने पर लोग आसानी से बातचीत भी कर लेते हैं, समूह में वे अपनी बात कहने में संकोच करते हैं। यात्रा प्रतिदिन विशालखंड, गोमतीनगर से प्रारंभ हुई और पहले लखनऊ के विभिन्न छोरों पर पहुंची फिर वहां से विधानभवन पर आकर संपन्न हुई।
पहले दिन यात्रा चिनहट तिराहे पहुंची फिर निशातगंज होते हुए विधानभवन पहुंची। इसी प्रकार दूसरे दिन इंदिरानगर, मुंशी पुलिया से कुकरैल पिकनिक स्पाट, तीसरे दिन इसी रूट से इंजीनियरिंग कालेज चौराहे, चौथे दिन चौक, ठाकुरगंज, बालागंज से दुबग्गा, पांचवें दिन कैंट, आलमबाग, कृष्णानगर, सरोजनीनगर से अमौसी, छठवें दिन कैंट, तेलीबाग से पीजीआई साइकिल सम्मान यात्रा पहुंची। फिर वहां से चलकर विधानभवन पर आकर संपन्न हुई। सातवें दिन यात्रा अंबेडकर पार्क, गोमतीनगर से शुरू होकर विधानभवन तक पहुंची। यात्रा में दो दिन एक पर्यावरण मित्र नंदराम सिंह यादव ने भी पूरा साथ निभाया। आठवें दिन यात्रा पहले हाईकोर्ट, कैसरबाग पहुंचेगी फिर वहां से मुख्यमंत्री आवास तक आयेगी।
मंच के अध्यक्ष तारा पाटकर ने कहा कि दिल्ली में मेट्रो रेल के आने से थोडी तो राहत मिली लेकिन सडकों पर जाम आदि कम नहीं हो पाया। उसकी वजह साइकिल को न अपनाना है। अगर 3-5 किलोमीटर दूरी तक रहने वाले लोग साइकिल से मेट्रो स्टेशन तक आते, तो दिल्ली को जाम और प्रदूषण से मुक्ति मिल जाती लेकिन झूठी शान के चक्कर में लोग कारें त्यागने को तैयार नहीं। और यही कारें दिल्ली को रूला रही हैं। अगर लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हफ्ते में कम से कम एक दिन साइकिल से दफ्तर जाने की पहल करें, मंत्रियों व अफसरों को साइकिल अपनाने के निर्देश दें, सभी विभागों के निजी प्रतिष्ठानों को बाध्य करें तो लखनऊ के काया कल्प होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह ही साइकिल है और अगर वह सप्ताह में एक दिन साइकिल डे घोषित करती है तो इससे उसे राजनैतिक फायदा होगा व देश में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई पहल होगी।
रास्ते में मिली हजार बाइक, साइकिलें सौ भी न दिखीं
लखनऊ। राजधानी के सभी कोनों से चलकर हर दिन विधानभवन तक आने वाली साइकिल सम्मान यात्रा 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचकर समाप्त होगी। वहां पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को एक ज्ञापन सौंपा जायेगा और उत्तर प्रदेश में साइकिल के सम्मान को फिर से बहाल कराने की मांग की जायेगी। यात्रा उत्तम प्रदेश बनाओ मंच के बैनर तले 24 अक्टूबर को चिनहट तिराहे से प्रारंभ हुई थी।
मंच के अध्यक्ष तारा पाटकर ने बताया कि साइकिल सम्मान यात्रा का आज छठवां दिन था और करीब 11.30 बजे संजय गांधी पीजीआई से यात्रा आरंभ की गई। आज की यात्रा की सबसे खास बात यह रही कि रास्ते में मिलने वाले साइकिल व बाइक सवारों की गिनती की गई। पीजीआई से लेकर हजरतगंज तक एक हजार से अधिक बाइक मिली लेकिन साइकिल सवार सौ का आंकडा भी नहीं छू पाये। सिर्फ 92 साइकिलें मिलीं। जहां तक कारों की बात थी तो उनकी संख्या भी 300 से ऊपर रही। पाटकर बताते हैं कि इस संबंध में जब लखनऊ साइकिल व्यापारी एसोसिएशन के महामंत्री नवीन अरोडा से पूछा गया था तो उनका कहना था कि राजधानी की साइकिल दुकानों में इस वक्त 90 फीसदी बच्चों की साइकिलें बिकती हैं, उन्हीं से हमारी रोजी रोटी चल रही है। वरना साइकिल की दुकानें बंद हो जायें। सडक किनारे बैठे साइकिल पंचर जोडने वालों ने भी बदहाली के चलते अब धंधा बदल दिया है। लखनऊ की आबादी जब 10 लाख भी नहीं थी तब हर दिन औसतन 300 साइकिलें बिकती थी और जब आबादी 40 लाख हो गई है तो 100 साइकिलें बेचना भी मुश्किल हो गया है।
पाटकर बताते हैं कि सबसे बडी विडम्बना ये है कि साइकिल बेचने वाले स्वयं भी अब साइकिल से चलना पसंद नहीं करते। वे भी अपनी दुकान बाइक या कार से आते हैं। यात्रा के दौरान तेलीबाग में शनि मंदिर के पास कुछ लोगों ने हमसे पूछा कि क्या आप रोज साइकिल चलाते हैं तो हमने कहा कि हां, अगर पांच किलोमीटर तक किसी काम से जाना है तो हम साइकिल का ही इस्तेमाल करते हैं। घर से सब्जी लेने या अन्य काम करने के लिए बाइक या कार का इस्तेमाल न करने का हम संकल्प ले चुके हैं। अगर लोग इतना ही करना शुरू कर दें तो सडकों को काफी राहत मिल जायेगी। जिन लोगों के दफ्तर या दुकानें घर से तीन किलोमीटर की दूरी में हैं, वे साइकिल से जायें तो सडकों पर जाम भी काम लगेगा, डीजल, पेट्रोल भी बचेगा और प्रदूषण भी कम होगा। राजधानी में बढते प्रदूषण पर काफी लगाम लगाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान लोग सम्मान यात्रा को काफी सराह रहे हैं। बहुत से लोग तो तुरंत साइकिल चलाने का संकल्प भी ले रहे हैं। हम मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात में यही आग्रह करेंगे कि वे जिस तरह चुनाव पूर्व साइकिल को वरीयता देते थे, फिर से वरीयता दें, अपने मंत्रियों, अफसरों को निर्देश दें। साइकिल यात्रा में पिछले दो दिन से पर्यावरण प्रेमी नंदराम सिंह यादव भी पूरा साथ दे रहे हैं।
हवाई जहाज की उडानों के बीच आकर्षण का केन्द्र बनी साइकिल
अमौसी से निकली साइकिल सम्मान यात्रा
लखनऊ। हवाई जहाजों की उडानों के बीच अमौसी हवाई अड्डे इलाके में आज साइकिल अचानक सबके आकर्षण का केन्द्र बन गई लेकिन यह साइकिल न तो बेहद कीमती व अलग किस्म की थी और न ही सात समुंदर पार से यहां लाई गई थी। यह पुराने स्टाइल की एक शुद्ध देशी साइकिल थी लेकिन उसमें बंधी तख्तियों में जो बेसकीमती नारे और टिप्स लिखे थे, वे सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहे थे। सडक के किनारे वाहन का इंतजार कर रहे लोगों की आंखें भी उस पर टिंकी थीं और गाडियों से गुजरते लोगों की भी।
बाइक और कार के इस दौर में जब लोग साइकिल को भूल से गये हैं, वह लोगों की दिनचर्या से दूर हो गई है, किसी ने पूछा कि ये साइकिल सम्मान यात्रा क्या है, क्या साइकिल का प्रचार है। यात्रा पर निकले उत्तम प्रदेश बनाओ मंच के प्रमुख तारा पाटकर ने बताया कि हां, साइकिल पर विलुप्त होने का खतरा मंडराने लगा है, इसलिए लोगों को साइकिल की उपयोगिताएं याद दिलाई जा रही हैं। अगर आप साइकिल को सम्मान देंगे तो पर्यावरण को सम्मान देंगे और आपको भी सम्मान मिलेगा। प्रदूषण कम होगा, लोगों का स्वास्थ्य सुधरेगा तभी उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश बनेगा।
राजधानी की सडकों पर पिछले पांच दिन से चल रही साइकिल सम्मान यात्रा आज दोपहर करीब 11.45 बजे अमौसी से शुरू हुई। अभी तक तारा पाटकर अकेले ही यात्रा कर रहे थे लेकिन आज उनके साथ एक पर्यावरण मित्र नंदराम सिंह यादव भी चल रहे थे। अमौसी मोड पर चाय की दुकान में चाय की चुस्कियां ले रहे आरएस चौधरी ने पूछा कि साइकिल चलाइये, सडकों से जाम भगाइये, ये तो समझ में आता है लेकिन साइकिल चलाइये, दौलत कमाइये, ये बात समझ में नहीं आई। पाटकर ने बताया कि मोटरसाइकिल, कार आदि चलाने से औसतन एक से तीन हजार रूपये तक लोग डीजल, पेट्रोल, सीएनजी आदि पर खर्च करते हैं। अगर छोटी दूरी तय करने में साइकिल का इस्तेमाल किया जायेगा तो कम से कम एक हजार रूपये तक की मासिक बचत होगी। अगर हम सेहत बनाने जिम जाते हैं तो वहां भी हजार-पांच सौ तो देने ही होंगे। इस तरह हर महीने करीब दो हजार, एक साल में 24 हजार रूपये की बचत होगी जिस धनराशि को हम किसी और जगह इस्तेमाल कर सकते हैं।
तारा पाटकर ने बताया कि लोग तनाव, डायबिटीज आदि को दूर करने के लिए तमाम दवाएं नियमित रूप से खाते हैं। अगर वे रोज एक घंटे साइकिल चलाएगें तो उनका मानसिक तनाव गायब हो जायेगा और डायबिटीज आदि भी नियंत्रण में रहेगी। दवाओं पर खर्च होने वाला हजारों रूपये भी बचेगा। अमौसी से चलने के बाद सम्मान यात्रा वाली ये साइकिल सरोजनीनगर, कृष्णानगर, आलमबाग, चारबाग, हुसैनगंज से लेकर विधानभवन तक लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनी रही। रास्ते में बहुत से लोगों ने साइकिल सम्मान यात्रा की तारीफ करते हुए यह कहा कि वाकई जिस तरह से शहरों में बेइंतहाशा बढ गयी कारों, आटो, बसें व मोटरसाइकिलों से रोज जाम भयानक समस्या बनता जा रहा हैं, प्रदूषण सबको रूला रहा है, साइकिल से चलना ही एकमात्र समाधान बचा है। साइकिल की मदद से ही हम पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपट सकते हैं। कल साइकिल सम्मान यात्रा पीजीआई से शुरू होगी और विधानभवन तक आयेगी।
प्रभु के सच्चे सेवक हैं साइकिल चलाने वाले-पाटकर
लखनऊ। साइकिल चलाने वाले प्रभु के सच्चे सेवक हैं और साइकिल चलाना असली प्रार्थना। प्रभु उनसे खुश होते हैं। यही लोग तो ऐसे हैं जो प्रभु की बनाई इस खूबसूरत दुनिया को प्रदूषित करके नुकसान नहीं पहुंचाते। शहर की प्रदूषित सांसों में और जहर नहीं घोलते। वे ट्रैफिक जाम का कारण नहीं बनते। बाकी सभी तो बस उसकी कायनात को बरबाद करने में ही लगे हैं। साइकिल सम्मान यात्रा लोगों को यही संदेश देना चाहती है कि वे साइकिल को अपनायें और पर्यावरण के सच्चा प्रहरी बनें।
ये उदगार आज उत्तम प्रदेश बनाओ मंच के प्रमुख तारा पाटकर ने व्यक्त किये जो राजधानी के विभिन्न कोनों से अकेले ही रोज साइकिल सम्मान यात्रा निकाल रहे हैं और 20-25 किलोमीटर चलते हैं। यात्रा का आज चौथा दिन था। यात्रा करीब 11.30 बजे दुबग्गा स्थित वरदानी हनुमान मंदिर से शुरू की गई। साइकिल में “पर्यावरण पूजा ही असली पूजा, साइकिल को सम्मान दो, साइकिल चलाएं तनाव भगाएं ” जैसे नारों वाली तख्तियां लगी थी जो लोगों का ध्यान बरबस अपनी ओर खींच रही थीं। यात्रा बालागंज, ठाकुरगंज, चौक, रूमी गेट होते हुए विधानभवन पर संपन्न हुई।
इस मौके पर इकट्ठे हुए लोगों से बातचीत में तारा पाटकर ने कहा कि अब सिर्फ मंदिर में जाकर घंटी बजाने से प्रभु आपकी प्रार्थना नहीं स्वीकार करने वाले, बल्कि आपको संकट में फंसी उसकी कायनात को बचाने के लिए कुछ करना होगा। लगातार बढ रहे पर्यावरण संकट को दूर करने में योगदान देने से ही आपकी प्रार्थना स्वीकार होगी। लखनऊ शहर भी अपनी खूबसूरती व नवावी तहजीब के लिए मशहूर था लेकिन अब सडकों पर बढती गाडियों, जाम व प्रदूषण ने शहर को बदसूरत व दम घोंटू बना दिया है। इन समस्याओं से निजाद पाने के लिए साइकिलिंग सबसे बेहतर तरीका है जिसके माध्यम से आप पर्यावरण को बेहतर बना सकते हैं और खुद को फिट भी रख सकते हैं।
श्री पाटकर ने कहा कि साइकिल चलाने से किसी की प्रतिष्ठा कम नहीं होती बल्कि बढती है। अब वक्त आ गया है कि बडे लोग साइकिलिंग की पहल करें। अगर बडे लोग छोटे-छोटे घरेलू कामकाज निपटाने के लिए साइकिल से चलने लगें तो उनकी देखा-देखी और लोग भी वैसा करने लगेंगे। लोगों को प्रयास करना चाहिए कि हफ्ते में एक-दो दिन साइकिल से दफ्तर भी जायें। मेरे एक पडोसी हैं जो शहर के प्रतिष्ठित डाक्टर भी हैं। मै देखता हूं कि वे सडक के उस पर बने जिम में जाने के लिए भी कार का इस्तेमाल करते हैं। वे चाहें तो दो कदम पैदल चलकर भी जिम जा सकते हैं लेकिन वे ऐसा इसलिए नहीं करते क्योंकि उनको लगता है इससे उनकी प्रतिष्ठा कम हो जायेगी। वे लंबी कार के माध्यम से जिम में आने वाले अन्य लोगों को अपनी शान-ओ-शौकत भी दिखाना चाहते हैं। अब इस सोच को बदलना होगा। साइकिल सम्मान यात्रा कल अमौसी से शुरू होगी।
विज्ञान नगरी में स्कूली बच्चों ने लिया साइकिल सम्मान का संकल्प
लखनऊ। कुकरैल के बाद साइकिल सम्मान यात्रा शनिवार को इंजीनियरिंग कालेज चौराहे से निकली। जब यात्रा पुरनिया होते हुए आंचलिक विज्ञान नगरी पहुंची तो वहां कानपुर से आये एक दर्जन से अधिक बच्चों व शिक्षकों ने साइकिल सम्मान करने का संकल्प लिया। लेकिन यात्रा के लिए शनिवार का दिन शुभ नहीं रहा। तीन जगह उसे बडी-बडी कारों व अन्य वाहनों के बीच जाम से जूझना पडा। कपूरथला, आईटी चौराहे व हजरतगंज के मुख्य चौराहे पर तो वाहनों की लंबी कतार देखकर यातायात पुलिस भी असहाय नजर आई।
पिछले दो दिनों की तरह आज भी साइकिल संकल्प यात्रा सुबह साढे दस बजे गोमतीनगर से इंजीनियरिंग कालेज के लिए रवाना हुई। विश्वास खंड, पालीटेक्निक व मुंशी पुलिया आदि चौराहों में से ऐसी कोई जगह नहीं दिखी जहां वाहनों की लंबी कतारें न मिली हों। यात्रा को इंजीनियर कालेज चौराहा होते हुए विधानभवन तक पहुंचने में ढाई घंटे लग गये। हकीकत तो यह है कि सडकों पर अब इतनी जगह ही नहीं बची कि साइकिल की सवारी की जा सके। लेकिन यात्रा का मकसद तब जरूर पूरा होता दिखाई दिया जब जाम में फंसे कार व मोटरसाइकिलों पर सवार लोग उत्सुकतावश तख्तियों में लिखे “साइकिल को सम्मान दो ” जैसे नारों को बार-बार दोहरा रहे थे।
सडकों पर बेतहाशा बढ गये वाहनों से उपजे जाम, प्रदूषण और बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए यात्रा शुरू करने वाले तारा पाटकर ने बताया कि यात्रा के दौरान लोग कई रोचक सवाल भी कर देते हैं। जैसे आज ही इंजीनियरिंग कालेज चौराहे पर सडक किनारे पान की गुमटी लगाये संतोष चौरसिया ने पूछा, क्या ये साइकिल सम्मान यात्रा समाजवादी पार्टी का प्रचार है ? तब मैंने कहा, नहीं, ये तो पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने का एक प्रयास है। गहराते पर्यावरण संकट को दूर करने के लिए साइकिल के माध्यम से हम व्यक्तिगत रूप से काफी योगदान दे सकते हैं। संतोष ने ये बात सुनकर सबसे पहले साइकिल सम्मान की शपथ ली। उसके बाद आंचलिक विज्ञान नगरी में कानपुर से आये करीब एक दर्जन बच्चों व उनके शिक्षकों ने ज्यादा से ज्यादा साइकिल प्रयोग करने का संकल्प लिया। इन बच्चों में अंशिका, नूपुर, आकाश, मोहित, अक्षय, पंकज आदि शामिल थे जिनको उनके शिक्षक अनुपम सारस्वत ने प्रेरित किया।
कपूरथला में जाम में फंसी एक टाटा सफारी पर अकेले सवार विनय सिंह ने मुस्कुराते हुए कहा कि साइकिल की सवारी वाकई अच्छी है। वाकिंग और साइकिलिंग न कर पाने की वजह से ही मेरा पेट इतना अधिक निकल आया है। सोचता हूं कि अब मैं भी सुबह साइकिलिंग शुरू कर दूं। साइकिल सम्मान यात्रा कल दुबग्गा से शुरू होगी।
तनाव रोकने
की सस्ती व कारगर दवा है साइकिलिंग-पाटकर
कुकरैल से
विधानभवन तक निकली साइकिल सम्मान यात्रा
लखनऊ। अगर एक
वयस्क इंसान नियमित रूप से एक दिन में 60 मिनट साइकिलिंग करता है तो तनाव उसके पास
फटक नहीं सकता। अब तो डाक्टर भी स्वीकार कर चुके हैं कि साइकिल चलाने से मानसिक
तनाव घटता है। जब हम साइकिलिंग करते हैं तो शरीर में रक्त संचार बढ जाता है और
पिटूयटरी व एड्रीनल ग्रंथियों से निकलने वाले हारमोन्स का स्रावण अधिक होने लगता
है जो तनाव को कम करने में बडी भूमिका निभाते हैं। साइकिल सम्मान यात्रा के तहत
राजधानी की सडकों पर पैडल भांज रहे तारा पाटकर ने आज ये बात कही।
कुकरैल
पिकनिक स्पाट से शुरू हुई दूसरे दिन की यात्रा जब दस किलोमीटर दूर विधानभवन पर
संपन्न हुई तो उन्होंने कहा कि भागम-भाग वाली इस जिन्दगी में मानसिक तनाव सबसे बडी
बीमारी बनती जा रही है। इसी तनाव से इंसान डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, ह्रदय रोग आदि
बढ रहे हैं। साइकिलिंग ऐसे रोगों को रोकने की एक सस्ती व कारगर दवा है। पाटकर ने
कहा कि साइकिल चलाने का असली मौसम तो अब आ रहा है। ठंड साइकिलिंग के लिए सबसे
बढिया मौसम है। चूंकि सर्दी में पसीना
नहीं निकलता, इसलिए भोजन, पानी आदि के माध्यम से शरीर में प्रवेश करने वाले
टाक्सिन भी बाहर नहीं निकल पाते। साइकिलिंग के माध्यम से पसीना बहाकर हम ऐसे
टाक्सिन आसानी से शरीर से उत्सर्जित कर सकते हैं। युवाओं को एक घंटे और बुजुर्गों
को 20-25 मिनट की साइकिलिंग इस मौसम में जरूर करना चाहिए। युवाओं को एक दिन में
सामान्यतः 10-15 किलोमीटर तक साइकिल चलाना चाहिए।
उत्तम प्रदेश
बनाओ मंच के अध्यक्ष तारा पाटकर ने बताया कि साइकिल तो मोबाइल जिम है जिसके माध्यम
से हर तरह की एक्सर्साइज मुफ्त में हो जाती है। गरीब इसी साइकिल जिम के सहारे अपने
को फिट रखते हैं। न उनका पेट निकलता है और न तनाव उनको डस पाता है। उन्होंने कहा
कि सामान्य आदमी के शरीर को एक दिन में 5-6 लीटर पानी की जरूरत होती है। गर्मियों
में तो लोग पर्याप्त पानी पी लेते हैं लेकिन सर्दी में वे बहुत कम पानी पीते हैं
और शरीर से टाक्सिन निकलने में अवरोध पैदा होने लगता है। साइकिल चलाने के बाद
इंसान को जोरदार प्यास लगती है और वो आसानी से पानी पी लेता है। साइकिल चलाने
वालों के फेफडे भी मजबूत रहते हैं। चीन, जापान और यूरोप के मुल्कों में साइकिल को
काफी सम्मान मिलता है। लोग साइकिल का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करते हैं इसलिए वहां
प्रदूषण, ट्रैफिक जाम आदि की समस्या है ही
नहीं। काश, हमारे देश में भी वो वक्त जल्दी आये। तारा पाटकर ने बताया कि साइकिल
सम्मान यात्रा तीसरे दिन पूर्वान्ह 11 बजे इंजीनियरिंग कालेज चौराहे से शुरू होगी
और विधानभवन पर आकर संपन्न होगी।
चिनहट से विधानभवन तक निकली साइकिल सम्मान यात्रा
मुख्यमंत्री से की “साइकिल डे” घोषित करने की मांग
लखनऊ। उत्तम प्रदेश बनाओ मंच ने आज चिनहट से विधानभवन तक साइकिल सम्मान यात्रा निकाली और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से सप्ताह में एक दिन “साइकिल डे” घोषित करने की मांग की। मंच के अध्यक्ष तारा पाटकर ने कहा कि साइकिल की सवारी से ही उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाया जा सकता है। साइकिल चलाने से लोगों का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और पर्यावरण भी प्रदूषणमुक्त रहेगा। सडकों को जाम से मुक्ति मिलेगी। साथ ही हर महीने डीजल, पेट्रोल पर खर्च होने वाले करोडों रूपये भी बचेंगे। कुल मिलाकर साइकिल के सम्मान से तमाम तरह की परेशानियों से प्रदेश वासियों को राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को सप्ताह में एक दिन स्वयं साइकिल से दफ्तर जाना चाहिए और अपने सभी मंत्रियों व अफसरों को कार के बजाय साइकिल से आने के लिए निर्देश देना चाहिए। इससे आम जनता भी ऐसा करने के लिए प्रेरित होगी। राजधानी लखनऊ में एक दिन ऐसा भी होना चाहिए जब सडकों पर कोई वाहन ही न दिखें। सिर्फ साइकिल और रिक्शे ही चलें। रिक्शे उनके लिए जो साइकिल से चलने में असमर्थ हैं। साइकिल के माध्यम से हम पर्यावरण संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।
पाटकर ने कहा कि सडकों पर साइकिलों की संख्या दिन प्रति दिन घटती जा रही है। कार व बाइक की संख्या ज्यादा हो गई है। लोग घर के छोटे-छोटे काम निपटाने के लिए चंद कदम जाने में भी मोटर गाडियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिससे दुर्घटनाओं में भी भारी इजाफा हो रहा है। जिसे रोकने के लिए अब साइकिल का प्रयोग बहुत अनिवार्य हो गया है।
भारी ट्रैफिक व शोर-शराबे के बीच यात्रा चिनहट से पूर्वान्ह 11 बजे शुरू हुई और इंदिरानगर, निशातगंज, सिकंदरबाग, अशोक मार्ग, हजरतगंज होते हुए विधानभवन की परिक्रमा करने के बाद लगभग 12 बजे दारूलशफा पहुंचकर खत्म हुई। साइकिल यात्रा के दौरान सडकों पर तमाम लोग बार-बार अपने वाहन धीमा करके उत्सुकता से यात्रा का सबब जानने की कोशिश कर रहे थे। कल शुक्रवार को साइकिल सम्मान यात्रा पूर्व निर्धारित समय 11 बजे कुकरैल पिकनिक स्पाट चैराहे से शुरू होगी और विधानभवन तक चलेगी। शनिवार को इंजीनियरिंग कालेज चैराहे से, रविवार को दुबग्गा से, सोमवार को अमौसी से, मंगलवार को, एसजीपीजीआई से, बुधवार को अंबेडकर पार्क, गोमतीनगर और गुरूवार को हाईकोर्ट से शुरू होकर विधानभवन पर आकर संपन्न होगी।
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