Wednesday, November 6, 2013

तनाव रोकने की सस्ती व कारगर दवा है साइकिलिंग-पाटकर
कुकरैल से विधानभवन तक निकली साइकिल सम्मान यात्रा
लखनऊ। अगर एक वयस्क इंसान नियमित रूप से एक दिन में 60 मिनट साइकिलिंग करता है तो तनाव उसके पास फटक नहीं सकता। अब तो डाक्टर भी स्वीकार कर चुके हैं कि साइकिल चलाने से मानसिक तनाव घटता है। जब हम साइकिलिंग करते हैं तो शरीर में रक्त संचार बढ जाता है और पिटूयटरी व एड्रीनल ग्रंथियों से निकलने वाले हारमोन्स का स्रावण अधिक होने लगता है जो तनाव को कम करने में बडी भूमिका निभाते हैं। साइकिल सम्मान यात्रा के तहत राजधानी की सडकों पर पैडल भांज रहे तारा पाटकर ने आज ये बात कही।
कुकरैल पिकनिक स्पाट से शुरू हुई दूसरे दिन की यात्रा जब दस किलोमीटर दूर विधानभवन पर संपन्न हुई तो उन्होंने कहा कि भागम-भाग वाली इस जिन्दगी में मानसिक तनाव सबसे बडी बीमारी बनती जा रही है। इसी तनाव से इंसान डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, ह्रदय रोग आदि बढ रहे हैं। साइकिलिंग ऐसे रोगों को रोकने की एक सस्ती व कारगर दवा है। पाटकर ने कहा कि साइकिल चलाने का असली मौसम तो अब आ रहा है। ठंड साइकिलिंग के लिए सबसे बढिया मौसम है। चूंकि सर्दी में  पसीना नहीं निकलता, इसलिए भोजन, पानी आदि के माध्यम से शरीर में प्रवेश करने वाले टाक्सिन भी बाहर नहीं निकल पाते। साइकिलिंग के माध्यम से पसीना बहाकर हम ऐसे टाक्सिन आसानी से शरीर से उत्सर्जित कर सकते हैं। युवाओं को एक घंटे और बुजुर्गों को 20-25 मिनट की साइकिलिंग इस मौसम में जरूर करना चाहिए। युवाओं को एक दिन में सामान्यतः 10-15 किलोमीटर तक साइकिल चलाना चाहिए।
उत्तम प्रदेश बनाओ मंच के अध्यक्ष तारा पाटकर ने बताया कि साइकिल तो मोबाइल जिम है जिसके माध्यम से हर तरह की एक्सर्साइज मुफ्त में हो जाती है। गरीब इसी साइकिल जिम के सहारे अपने को फिट रखते हैं। न उनका पेट निकलता है और न तनाव उनको डस पाता है। उन्होंने कहा कि सामान्य आदमी के शरीर को एक दिन में 5-6 लीटर पानी की जरूरत होती है। गर्मियों में तो लोग पर्याप्त पानी पी लेते हैं लेकिन सर्दी में वे बहुत कम पानी पीते हैं और शरीर से टाक्सिन निकलने में अवरोध पैदा होने लगता है। साइकिल चलाने के बाद इंसान को जोरदार प्यास लगती है और वो आसानी से पानी पी लेता है। साइकिल चलाने वालों के फेफडे भी मजबूत रहते हैं। चीन, जापान और यूरोप के मुल्कों में साइकिल को काफी सम्मान मिलता है। लोग साइकिल का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करते हैं इसलिए वहां प्रदूषण, ट्रैफिक जाम आदि की  समस्या है ही नहीं। काश, हमारे देश में भी वो वक्त जल्दी आये। तारा पाटकर ने बताया कि साइकिल सम्मान यात्रा तीसरे दिन पूर्वान्ह 11 बजे इंजीनियरिंग कालेज चौराहे से शुरू होगी और विधानभवन पर आकर संपन्न होगी।
 

2 comments:

  1. are u talking about cycle meditation...nice idea...really cycling is bone for health...

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  2. commendable effort we all are inspired!!!

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