आतिशबाजी शुरू होते ही धुआं-धुआं हो गई
सडकें
लखनऊ, 4 नवंबर। महंगाई भी आतिशबाजी के शौकीनों को नहीं रोक पाई। बच्चे तो
क्या बडे-बूढे और समझदार लोग जो खुद को पर्यावरण का बहुत बडा हितैषी होने का दावा
करते हैं, वे भी देखा-देखी
के फेर में सब कुछ भूल गये और ईश्वर की इस खूबसूरत कायनात को घायल करने में नहीं
चूके। आलम तो यह था कि दीवाली की पूजा के बाद कुछ घंटों की आतिशबाजी में ही शहर की
सडकों पर धुआं ही धुआं छा गया। वाहनों की गति धीमी हो गई। पटाखों के कचरे, कूडा-करकट से सडकें और मुहल्लों की गलियां
पट गईं। उम्मीद थी कि पिछले वर्षों के कटु अनुभव से लोग कुछ सबक लेंगे लेकिन कहीं
भी ऐसा देखने को नहीं मिला। बल्कि उल्टा ही हुआ। इस वर्ष आतिशबाजी का कहर और
ज्यादा बढ गया। हालांकि तेज आवाज वाले पटाखों की तुलना में आसमानी व रोशनी करने
वाले पटाखों ज्यादा जलाए गये। रविवार को तापमान में कमी रही। जिससे मौसम भी बदला
बदला नजर आया। आसमान साफ होने की वजह से धुआं छट नहीं पाया और धुएं की एक चादर सी
वातावरण में बिछी रही। पेडों की पत्तियों में भी प्रदूषण की मोटी परतें जमी दिखी।
दीवाली के चंद घंटों में जो कहर वातावरण पर छाया, उससे हुए नुकसान की भरपाई करने में प्रकृति को हफ्तों तो लग
ही जायेंगे। श्वास और अस्थमा संबंधी बीमारियों से पीडित लोगों के लिए तो भारी
मुसीबत रहेगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अलींगंज, विकासनगर, जानकीपुरम,
कल्याणपुर, खुर्रमनगर, इंदिरानगर,
गोमतीनगर, आलमबाग, राजाजीपुरम समेत शहर के अधिकांश इलाकों में जमकर आतिशबाजी
हुई। पटाखों के थोक बाजार में साढे सात बजे के बाद पटाखों के बडे आइटम खत्म हो गये
थे। आतिशबाजी कारोबारियों के अनुसार रविवार को अकेले करीब बीस करोड की आतिशबाजी का
कारोबार हुआ।
दीपावली के तोहफे में मिलेगा शहर को दो सौ
टन अतिरिक्त कचरा
लखनऊ, 4 नवंबर। दीपावली के तोहफे में
शहरवासी लखनऊ को दो सौ टन अतिरिक्त कचरे का तोहफा देंगे। रोज शहर से करीब
14 सौ टन कूडा निकलता है। दीवाली के बाद अगले दिन सोमवार को यह बढकर सोलह सौ टन हो
जायेगा। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. पीके सिंह ने बताया कि नगर निगम इस कूडे को
बटोरने के लिए विशेष व्यवस्था कर रहा है।
इक ये भी दीवाली है..इक वो भी दीवाली थी..रोता हुआ गुलशन है..रोता हुआ माली है...काश..इंसानों की समझ में आ जाये कि पर्यावरण की पूजा ही असली पूजा है..बाकी पूजा उसके बाद है...
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