Wednesday, November 6, 2013
विज्ञान नगरी में स्कूली बच्चों ने लिया साइकिल सम्मान का संकल्प
लखनऊ। कुकरैल के बाद साइकिल सम्मान यात्रा शनिवार को इंजीनियरिंग कालेज चौराहे से निकली। जब यात्रा पुरनिया होते हुए आंचलिक विज्ञान नगरी पहुंची तो वहां कानपुर से आये एक दर्जन से अधिक बच्चों व शिक्षकों ने साइकिल सम्मान करने का संकल्प लिया। लेकिन यात्रा के लिए शनिवार का दिन शुभ नहीं रहा। तीन जगह उसे बडी-बडी कारों व अन्य वाहनों के बीच जाम से जूझना पडा। कपूरथला, आईटी चौराहे व हजरतगंज के मुख्य चौराहे पर तो वाहनों की लंबी कतार देखकर यातायात पुलिस भी असहाय नजर आई।
पिछले दो दिनों की तरह आज भी साइकिल संकल्प यात्रा सुबह साढे दस बजे गोमतीनगर से इंजीनियरिंग कालेज के लिए रवाना हुई। विश्वास खंड, पालीटेक्निक व मुंशी पुलिया आदि चौराहों में से ऐसी कोई जगह नहीं दिखी जहां वाहनों की लंबी कतारें न मिली हों। यात्रा को इंजीनियर कालेज चौराहा होते हुए विधानभवन तक पहुंचने में ढाई घंटे लग गये। हकीकत तो यह है कि सडकों पर अब इतनी जगह ही नहीं बची कि साइकिल की सवारी की जा सके। लेकिन यात्रा का मकसद तब जरूर पूरा होता दिखाई दिया जब जाम में फंसे कार व मोटरसाइकिलों पर सवार लोग उत्सुकतावश तख्तियों में लिखे “साइकिल को सम्मान दो ” जैसे नारों को बार-बार दोहरा रहे थे।
सडकों पर बेतहाशा बढ गये वाहनों से उपजे जाम, प्रदूषण और बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए यात्रा शुरू करने वाले तारा पाटकर ने बताया कि यात्रा के दौरान लोग कई रोचक सवाल भी कर देते हैं। जैसे आज ही इंजीनियरिंग कालेज चौराहे पर सडक किनारे पान की गुमटी लगाये संतोष चौरसिया ने पूछा, क्या ये साइकिल सम्मान यात्रा समाजवादी पार्टी का प्रचार है ? तब मैंने कहा, नहीं, ये तो पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने का एक प्रयास है। गहराते पर्यावरण संकट को दूर करने के लिए साइकिल के माध्यम से हम व्यक्तिगत रूप से काफी योगदान दे सकते हैं। संतोष ने ये बात सुनकर सबसे पहले साइकिल सम्मान की शपथ ली। उसके बाद आंचलिक विज्ञान नगरी में कानपुर से आये करीब एक दर्जन बच्चों व उनके शिक्षकों ने ज्यादा से ज्यादा साइकिल प्रयोग करने का संकल्प लिया। इन बच्चों में अंशिका, नूपुर, आकाश, मोहित, अक्षय, पंकज आदि शामिल थे जिनको उनके शिक्षक अनुपम सारस्वत ने प्रेरित किया।
कपूरथला में जाम में फंसी एक टाटा सफारी पर अकेले सवार विनय सिंह ने मुस्कुराते हुए कहा कि साइकिल की सवारी वाकई अच्छी है। वाकिंग और साइकिलिंग न कर पाने की वजह से ही मेरा पेट इतना अधिक निकल आया है। सोचता हूं कि अब मैं भी सुबह साइकिलिंग शुरू कर दूं। साइकिल सम्मान यात्रा कल दुबग्गा से शुरू होगी।
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काश..बच्चों की तरह बडे भी दिखाते साइकिलिंग प्रेम...
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